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नहीं, à¤à¤¸à¤¾ जरà¥à¤°à¥€ नहीं है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लोगों को à¤à¥€ हर समय सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम के विषाणॠहमला करते रहते हैं।
कà¥à¤› अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ बताते हैं कि रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कम होने से (उदाहरण के लिà¤, किसी दीरà¥à¤˜à¤•ालीन बीमारी या तनाव की वजह से) सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम के लकà¥à¤·à¤£ और बदतà¥à¤¤à¤° हो सकते हैं। मगर, à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¥€ सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम के कम से कम 200 अलग-अलग विषाणà¥à¤“ं में से किसी à¤à¤• से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो सकता है।
आपके शिशॠकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ अà¤à¥€ विकसित हो रही होती है और पहले साल में उसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम होना आम है। छह महीने तक अननà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाना शिशॠके विकसित हो रही पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को सहयोग देने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
छह महीने के बाद, आपके शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध के अलावा à¤à¥€ अनà¥à¤¯ आहारों की जरà¥à¤°à¤¤ होती है, ताकि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठजरà¥à¤°à¥€ पोषक ततà¥à¤µ उसे मिल सकें। मगर, करीब à¤à¤• साल का होने तक जब तक आपका शिशॠपूरी तरह à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाना शà¥à¤°à¥ नहीं कर देता, तब तक सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ और à¤à¤‚टीबॉडीज के लिठà¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ रहेगा।
जब शिशॠठोस आहार लेना शà¥à¤°à¥ करता है, तो अलग-अलग आहार उसे पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करेंगे, जो सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के लिठजरà¥à¤°à¥€ है। शिशॠको अलग-अलग सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ मिलें, इसके लिठजरà¥à¤°à¥€ है कि आप इंदà¥à¤°à¤§à¤¨à¥à¤· के सà¤à¥€ रंगों वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ अपने शिशॠको खिलाà¤à¤‚। अलग-अलग रंगों वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ के लिठआप हमारा सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡à¤¶à¥‹ देखें:
लाल और à¤à¥‚रे à¤à¥‹à¤œà¤¨
नारंगी à¤à¥‹à¤œà¤¨
पीले à¤à¥‹à¤œà¤¨
हरे à¤à¥‹à¤œà¤¨
नीले और जामà¥à¤¨à¥€ à¤à¥‹à¤œà¤¨
सफेद à¤à¥‹à¤œà¤¨
शिशॠकी इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ मजबूत करने के लिठइन à¤à¥‹à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ अपने आहार में शामिल करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।
जैसे-जैसे आपका शिशॠबढ़ता है, उसकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ à¤à¥€ परिपकà¥à¤µ होती है और अब वह कम बीमार पड़ेगा। हालांकि, यदि आपको शिशॠको बार-बार जà¥à¤•ाम या खांसी होने को लेकर चिंता है, तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। वे बचà¥à¤šà¥‡ को विटामिन देने की सलाह दे सकती हैं, या फिर बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ देख सकती हैं।
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